हादसे रोकने के लिए प्रशासनिक निर्देशों का धरातल पर असर जरूरी
जमशेदपुर सहित पूरे पूर्वी सिंहभूम जिले में सड़क दुर्घटनाओं का बढ़ता ग्राफ अब एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।
आए दिन तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण हो रहे सड़क हादसे अनगिनत परिवारों को उजाड़ रहे हैं।
ऐसे समय में, जिला प्रशासन द्वारा राजमार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने, तेज रफ्तार पर लगाम कसने और अवैध पार्किंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्णय एक बेहद स्वागत योग्य और समयोचित कदम है।
जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई हालिया बैठक में जो दिशा-निर्देश दिए गए हैं, यदि उन पर पूरी ईमानदारी से अमल हो, तो इन हादसों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
सड़क हादसों के पीछे ओवरस्पीडिंग (तेज रफ्तार) और राजमार्गों पर बेतरतीब खड़े भारी वाहन सबसे बड़े खलनायक साबित हो रहे हैं।
एनएच पर अवैध पार्किंग न केवल सुगम यातायात में बाधक है, बल्कि रात के समय यह वाहन चालकों के लिए मौत का जाल बन जाते हैं।
प्रशासन द्वारा एनएचएआई और जिला परिवहन विभाग को आपस में समन्वय बनाकर ऐसे वाहनों की तस्वीरें और वीडियो साझा कर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश एक सटीक कदम है।
इसके साथ ही, प्रमुख स्थानों पर गति मापने वाले उपकरण लगाने की प्रक्रिया को गति देना और नो-पार्किंग जोन में चेतावनी बोर्ड लगाना बेहद जरूरी है, ताकि चालकों में कानून का डर बना रहे।
सड़क की खराब स्थिति और बड़े-बड़े गड्ढे भी वाहन चालकों का संतुलन बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।
बहरागोड़ा पुल के नीचे क्षतिग्रस्त सड़क और अन्य दुर्घटना संभावित स्थलों (ब्लैक स्पॉट्स) की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराने का निर्देश दूरगामी सोच को दर्शाता है।
इसके साथ ही, किसी भी दुर्घटना के बाद ‘गोल्डन ऑवर’ (शुरुआती एक घंटा) में घायल को अस्पताल पहुंचाना उसकी जान बचाने की सबसे बड़ी शर्त होती है।
प्रशासन द्वारा एंबुलेंस और क्रेन की त्वरित तैनाती सुनिश्चित करने तथा ट्रॉमा सेंटर, अनुमंडल अस्पताल घाटशिला, बालीगुमा और बेलाजुड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को एलर्ट मोड पर रखने का निर्देश यह सुनिश्चित करता है कि आपदा के समय चिकित्सा सहायता में कोई देरी न हो।
सड़क सुरक्षा किसी एक विभाग या केवल प्रशासन अकेले की जिम्मेदारी नहीं है।
इसके लिए पुलिस, परिवहन विभाग, एनएचएआई और स्वास्थ्य विभाग को आपसी तालमेल के साथ ठोस रणनीति पर काम करना होगा।
साथ ही, आम नागरिकों को भी यातायात नियमों के प्रति जागरूक होना पड़ेगा।
प्रशासन के ये निर्देश तभी सार्थक साबित होंगे जब इन्हें केवल बैठकों और फाइलों तक सीमित न रखकर जमीन पर उतारा जाए।
हादसों को रोकने के लिए यह अभियान एकमुश्त कार्रवाई न बनकर निरंतर चलने वाली प्रक्रिया बननी चाहिए, क्योंकि हर एक नागरिक की जान अनमोल है।
