September 6, 2026
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हेमंत सरकार: सोनू चौथे मंत्री, जिनका कार्यकाल के दौरान हुआ आकस्मिक निधन

हेमंत सरकार: सोनू चौथे मंत्री, जिनका कार्यकाल के दौरान हुआ आकस्मिक निधन

सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से फिर गूंजा पुराने असमय निधन का दर्द

  • मुख्य बिंदु:
  • सुदिव्य कुमार सोनू का गिरिडीह में आकस्मिक निधन
  • रामदास सोरेन का इलाज के दौरान दिल्ली में निधन हुआ
  • जगरनाथ महतो और हाजी हुसैन अंसारी भी सेवाकाल में गुजरे

रांची – झारखंड ने सेवाकाल में कई कद्दावर मंत्रियों को खोया है।
झारखंड की राजनीति में ऐसे कई दुखद अध्याय दर्ज हैं।
हालांकि, सुदिव्य कुमार सोनू का आकस्मिक निधन नई घटना है।
उनके निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है।
सुदिव्य कुमार सोनू गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र के विधायक थे।
वह उच्च शिक्षा, शहरी विकास और खेल मंत्री थे।
6 सितंबर 2026 को गिरिडीह में उनका निधन हुआ।
अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हुई।
वहीं, रामदास सोरेन भी सेवाकाल में दिवंगत हुए।
वह घाटशिला के विधायक और स्कूली शिक्षा मंत्री थे।
15 अगस्त 2025 को उनका निधन हुआ था।
आवास पर गिरने के बाद उनका इलाज चला था।
इसके बाद दिल्ली के अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ा।
इसी तरह, जगरनाथ महतो भी लोकप्रिय मंत्री रहे।
वह डुमरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक थे।
वह शिक्षा मंत्री के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे।
हालांकि, 6 अप्रैल 2023 को उनका निधन हुआ।
चेन्नई के अस्पताल में फेफड़ों के संक्रमण से मौत हुई।
उन्हें पारा शिक्षकों के स्थायीकरण का श्रेय दिया जाता है।
इसके अलावा, हाजी हुसैन अंसारी भी सेवाकाल में गुजरे।
वह मधुपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक और मंत्री थे।
वह अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
वहीं, कोरोना संक्रमण से उबरने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी।
3 अक्टूबर 2020 को रांची में उनका निधन हुआ।
दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्होंने दम तोड़ा।
इन नेताओं के निधन से विभागों में बदलाव हुए।
कई विभागों का अतिरिक्त प्रभार मुख्यमंत्री ने संभाला।
कुछ जिम्मेदारियां अन्य मंत्रियों को भी सौंपी गईं।
इसके बाद राजनीतिक उत्तराधिकार का दौर भी सामने आया।
जगरनाथ महतो की पत्नी बेबी देवी राजनीति में आईं।
उन्होंने उपचुनाव जीतकर उनकी राजनीतिक विरासत संभाली।
इसी तरह, हाजी हुसैन अंसारी के बेटे हफीजुल हसन आगे आए।
उन्होंने भी उपचुनाव जीतकर राजनीतिक जिम्मेदारी संभाली।
उधर, इन नेताओं के निधन से झामुमो को झटके लगे।
इनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं पर भी गहरा असर पड़ा।
हालांकि, राजनीतिक जीवन में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।
सेवाकाल में निधन ने कई बार नेतृत्व को प्रभावित किया।

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