जमशेदपुर: मानगो नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने सोमवार को नगर निगम पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि निगम को कुछ लोग ‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनी’ की तरह चला रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कुछ अधिकारी 2029 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किसी विशेष व्यक्ति के हित में काम कर रहे हैं, तो उन्हें अपनी कार्यशैली में तत्काल सुधार करना चाहिए।
जनता दल (यूनाइटेड) द्वारा आयोजित तथा भाजपा, लोजपा और आजसू समर्थित ‘मानगो नगर निगम की विकास विरोधी नीतियों और तानाशाही के खिलाफ’ धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सरयू राय ने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य जनता को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में ऐसा होता नहीं दिख रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम का संचालन कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों में सिमट गया है।
38 योजनाओं के क्रियान्वयन पर उठाए सवाल
सरयू राय ने कहा कि 38 विकास योजनाओं का शिलान्यास होने के बावजूद उन्हें धरातल पर नहीं उतारा गया। उन्होंने सवाल किया कि आखिर नगर निगम इन योजनाओं को लागू करने से पीछे क्यों हट गया और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोपनीय दस्तावेज पहुंचने पर भी सवाल
विधायक ने रविवार को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए कहा कि प्रेस वार्ता करने वाला व्यक्ति नगर निगम का कर्मचारी नहीं था। ऐसे में उसके पास निगम के दस्तावेज कैसे पहुंचे, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने इसे गोपनीयता का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
‘जनता का पैसा, कमीशन का खेल’
सरयू राय ने आरोप लगाया कि सरकार से मिलने वाली ग्रांट और करदाताओं के पैसे का सही उपयोग नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं में भारी कमीशनखोरी हो रही है, जबकि कई योजनाएं अधूरी पड़ी हैं। उन्होंने नालों की सफाई का उदाहरण देते हुए दावा किया कि केवल करीब 10 प्रतिशत नालों की सफाई हुई, जबकि भुगतान पूरा कर दिया गया।
नगर निगम के कामकाज में बदलाव की मांग
उन्होंने बताया कि नगर विकास मंत्री को सुझाव दिया गया है कि नगर निगम के कार्यों को दो हिस्सों में बांटा जाए। एक भाग में जनसुविधाओं से जुड़े कार्य और दूसरे में विकास योजनाएं शामिल हों, ताकि कार्यों की बेहतर निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन हो सके। हालांकि, अब तक इस प्रस्ताव पर कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
पार्षदों की नाराजगी का किया जिक्र
सरयू राय ने दावा किया कि नगर निगम की कार्यशैली से कई पार्षद असंतुष्ट हैं और उन्होंने अलग समूह बना लिया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई चाहे तो इन्हीं पार्षदों के समर्थन से मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है, लेकिन उनका उद्देश्य ऐसा करना नहीं है।
अधिकारियों और ठेकेदारों पर लगाए गंभीर आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ठेकेदार अपनी गलतियों को छिपाने के लिए अधिकारियों को पैसे देते हैं, जो भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। उन्होंने ठेकेदारों को चेतावनी दी कि ऐसी गतिविधियों से भविष्य में उन्हें गंभीर कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
विधायक ने यह भी कहा कि अपर नगर आयुक्त उनकी ओर से भेजे गए पत्रों का जवाब नहीं देते, जबकि नियमों के अनुसार जनप्रतिनिधियों के पत्रों का उत्तर देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो विधायी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई का प्रावधान मौजूद है।
भाजपा और आजसू नेताओं ने भी साधा निशाना
धरने में भाजपा नेता अभिनव सिंह ने कहा कि मेयर को यह समझना चाहिए कि उनके अपने पार्षद भी कार्यशैली से संतुष्ट नहीं हैं। यदि विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए।
आजसू के जिलाध्यक्ष कन्हैया सिंह ने आरोप लगाया कि वर्तमान कार्यकाल में विकास कार्य लगभग ठप हो गए हैं। उन्होंने कहा कि विधायक निधि की योजनाओं में भी बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पूर्व मेयर प्रत्याशी संध्या सिंह ने भी मेयर पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें मानगो की जमीनी समस्याओं की पर्याप्त जानकारी नहीं है। उन्होंने पानी के टैंकर संचालन को रोके जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे जनता के बीच उनकी लोकप्रियता कम नहीं होगी।
धरना-प्रदर्शन में भाजपा, जदयू, आजसू और अन्य दलों के कई नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और नगर निगम की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग की।
JDU का मेयर सुधा गुप्ता पर हमला, कहा- लड्डू बांटकर धरने की गंभीरता कम करने की हुई कोशिश
जमशेदपुर: जनता दल (यूनाइटेड) ने एनडीए समर्थित धरने के दौरान मानगो नगर निगम की मेयर सुधा गुप्ता की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने धरने की गंभीरता को कम करने के लिए राजनीतिक पैंतरेबाजी की।
पार्टी का दावा है कि धरनास्थल पर लड्डू बंटवाकर आंदोलन का फोकस भटकाने की कोशिश की गई, लेकिन कार्यकर्ताओं ने इस प्रयास को सफल नहीं होने दिया। जदयू ने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ताओं द्वारा मेयर को पूड़ी-सब्जी खिलाना केवल औपचारिक व्यवहार था और इससे पार्टी के रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा।
पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि मेयर वास्तव में जनसमस्याओं को लेकर गंभीर होतीं तो धरनास्थल पर अपर नगर आयुक्त को बुलाकर सवालों का जवाब दिलातीं, क्योंकि धरना नगर निगम की कार्यप्रणाली के खिलाफ था, किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं। जदयू का आरोप है कि मेयर ने मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय बहस का माहौल बनाया और कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
जदयू ने हाल में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि नगर निगम से असंबंधित और कांग्रेस से जुड़े लोगों को निगम का पक्ष रखने के लिए आगे किया गया। पार्टी ने सवाल उठाया कि निगम की गोपनीय फाइलें बाहरी लोगों तक कैसे पहुंचीं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। जदयू ने दोहराया कि नगर निगम में किसी भी अनियमितता और कानून के विरुद्ध होने वाले कार्यों का पार्टी लगातार विरोध करती रहेगी।
इधर मेयर सुधा गुप्ता ने दिखाई राजनीतिक शालीनता, धरने पर बैठे विधायक सरयू राय के पास पहुंच कर किया अभिवादन, आंदोलन करने वाले लोगो को गाड़ी से उतरवा कर पानी का बोतल बंटवाया।
उसके बाद लड्डू भेजकर सबका मुँह मीठा कराया। धरना के बाद जब जदयू नेता पप्पू सिंह और नीरज सिंह समेत दर्जनों कार्यकर्त्ता उनके कक्ष आये तो उन्होंने खडे होकर सबका अभिवादन किया। पप्पू सिंह और नीरज सिंह को लड्डू खिलाकर मुँह मीठा कराया, उनका ज्ञापन लिया और स्पष्ट कहा कि जनहित का कोई भी कार्य कोई नहीं रोक सकता, लेकिन भ्रष्टाचार और कार्य सामग्री में गुणवत्ता की कमी को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। काम में लापरवाही बरतने वाला कोई भी हो उस पर कार्यवाई जरूर होगी कोई भेदभाव नहीं होगा।
