सिमडेगा: झारखंड सरकार के विकास के दावों के बीच सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित बड़बेरा बेलकोना गांव की तस्वीर व्यवस्था की हकीकत बयां कर रही है। वर्षों से पुल निर्माण की मांग कर रहे ग्रामीणों की गुहार आज तक अनसुनी है। परिणामस्वरूप हर मानसून में पूरा गांव नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण बाहरी दुनिया से कट जाता है और लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर लकड़ी के जर्जर पुल के सहारे नदी पार करनी पड़ती है।
बरसात शुरू होते ही गांव के बीच से बहने वाली नदी उफान पर आ जाती है। नदी पर स्थायी पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने लकड़ियों के सहारे अस्थायी पुल बना रखा है, जो अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है।
इसके बावजूद ग्रामीणों के पास इसी पुल से आवाजाही करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता।
हर दिन खतरे के साये में स्कूल जाते हैं बच्चे
सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को झेलनी पड़ती है। उन्हें रोजाना इसी कमजोर लकड़ी के पुल से होकर स्कूल जाना पड़ता है। बारिश के दिनों में पुल और भी फिसलन भरा तथा असुरक्षित हो जाता है, जिससे हर समय किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंतित रहते हैं।
मरीजों को खाट पर लादकर नदी पार कराने की मजबूरी
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। गांव में कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तो उसे अस्पताल पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होता।
कई बार ग्रामीण मरीजों को खाट पर लादकर जर्जर पुल से नदी पार कर अस्पताल ले जाने को मजबूर होते हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।
कई बार लगाई गुहार, हर बार मिला सिर्फ आश्वासन
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने वर्षों से पुल निर्माण की मांग को लेकर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष कई बार आवेदन दिए और मुलाकात भी की, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। धरातल पर कोई ठोस पहल नहीं हुई।
सरकारी दावों पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन बड़बेरा बेलकोना गांव की बदहाल स्थिति उन दावों की पोल खोल रही है।
उनका कहना है कि अब धैर्य जवाब देने लगा है और उन्हें उम्मीद नहीं रह गई कि उनकी समस्या का जल्द समाधान होगा। ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से अविलंब स्थायी पुल का निर्माण कराने की मांग की है, ताकि हर साल बरसात में उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की मजबूरी से मुक्ति मिल सके।