September 3, 2026
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जमशेदपुर का हिमांशु सिंह हत्याकांड: एसएस पी पीयूष पांडे की छुट्टी, 36 साल पुराना ‘कमल नयन चौबे’ प्रकरण फिर हुआ ताजा

जमशेदपुर का हिमांशु सिंह हत्याकांड: एसएस पी पीयूष पांडे की छुट्टी, 36 साल पुराना ‘कमल नयन  चौबे’ प्रकरण फिर हुआ ताजा

शिव कुमार सिंह

रांची: बिष्टुपुर के डीडी बीयर बार विवाद के बाद, पुलिस की मौजूदगी में करणी सेना के युवा अध्यक्ष हिमांशु सिंह की हत्या ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है। इस सनसनीखेज वारदात के बाद सियासत, प्रशासन, आम जनता और कारोबारी जगत में भारी आक्रोश है। जनता के इसी गुस्से को शांत करने के लिए झारखंड की हेमंत सरकार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है।

सीएम हेमंत सोरेन का ‘बोल्ड’ फैसला: SSP पीयूष पांडे हटाए गए

स्थिति की गंभीरता और जनता के आक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। जमशेदपुर से ग्राउंड फीडबैक मिलने के बाद, मुख्यमंत्री ने खुद मंगलवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर आकर पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) पीयूष पांडे को पद से हटाने की जानकारी साझा की।

एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड: पूर्वी सिंहभूम जिला बनने के बाद पीयूष पांडे ऐसे पहले आला अधिकारी बन गए हैं, जिन्हें किसी हत्याकांड के तुरंत बाद सरकार द्वारा हटाया गया है।

1990 का अरविंद पांडे हत्याकांड: जब नपे थे IPS कमल नयन चौबे

पीयूष पांडे पर हुई इस गाज ने जमशेदपुर के इतिहास के 36 साल पुराने पन्नों को पलट दिया है। इससे पहले साल 1990 में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला था:

क्या था मामला? बागबेड़ा में युवा नेता अरविंद पांडे की हत्या हुई थी।

तब की सरकार: बिहार में तत्कालीन लालू प्रसाद यादव की सरकार थी, जो झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के समर्थन से चल रही थी।

दबाव की राजनीति: झामुमो ने लालू सरकार पर जबरदस्त राजनीतिक दबाव बनाया, जिसके बाद जमशेदपुर में एएसपी (ASP) के रूप में तैनात IPS अधिकारी कमल नयन चौबे को पद से हटाना पड़ा था।

भविष्य की कड़वी सच्चाई: यही कमल नयन चौबे आगे चलकर अलग झारखंड राज्य बनने पर यहाँ के डीजीपी (DGP) भी बने।

तब का मीडिया बनाम आज का सोशल मीडिया

1990 में न तो मोबाइल का जमाना था और न ही सोशल मीडिया का। लेकिन प्रिंट मीडिया की ताकत इतनी मजबूत थी कि जमशेदपुर से प्रकाशित हिंदी दैनिकों ‘उदित वाणी’ और ‘दैनिक आज’ ने पुलिस की लचर कार्यशैली और दूरदर्शिता पर इतने तीखे और तार्किक सवाल उठाए कि लालू सरकार को संज्ञान लेना ही पड़ा।

अब 2026 मैं हुए इस नए मामले में जमशेदपुर में निषेधाज्ञा लागू कर हेमंत सरकार ने उन उपद्रवी और राजनीतिक तत्वों के अरमानों पर पानी फेर दिया है, जो इस संकट की घड़ी में अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की फिराक में थे।

असली परीक्षा अभी बाकी: क्या मिलेगा इंसाफ?

प्रशासनिक फेरबदल और निषेधाज्ञा लागू करके हेमंत सरकार ने फिलहाल स्थिति को नियंत्रण में ले लिया है और जनता को एक सकारात्मक संदेश भी दिया है। हालांकि, शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और आम जनता का मानना है कि हेमंत सरकार की असली परीक्षा अब शुरू होगी।

अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर, दोषी और जिम्मेदार लोगों पर त्वरित व कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कर पाती है या नहीं।

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