एसआईआर में निष्पक्षता के साथ योग्य मतदाताओं के अधिकार भी सुरक्षित रहें
लोकतंत्र की विश्वसनीयता मतदाता सूची की शुद्धता से तय होती है। मतदाता सूची में छोटी गलती भी गंभीर असर डाल सकती है।
झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ा है। संथाल परगना से कई तरह की शिकायतें सामने आई हैं। साहिबगंज, राजमहल और पाकुड़ जैसे इलाकों का जिक्र हुआ है। कुछ मामलों में दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।
हालांकि, इन आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। आरोपों को अंतिम सत्य मानना भी उचित नहीं होगा। वहीं, शिकायतों की अनदेखी करना भी लोकतांत्रिक हित में नहीं है।
एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय बनाना होना चाहिए। इसमें अयोग्य नाम हटाना जरूरी है। इसके साथ योग्य नागरिकों के नाम सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
इसके अलावा, संवेदनशील क्षेत्रों में सत्यापन बेहद गंभीरता से होना चाहिए। संदिग्ध दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर भौतिक सत्यापन भी कराया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, निर्वाचन अधिकारियों पर किसी राजनीतिक दबाव की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को केवल संवैधानिक दायित्व के आधार पर काम करना होगा।
इसी बीच, राजनीतिक दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्हें शिकायतों को प्रमाणों के साथ सामने रखना चाहिए। साथ ही, सुधार प्रक्रिया में सहयोग भी देना चाहिए।
मतदाता सूची किसी दल की संपत्ति नहीं है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी नींव है। इसलिए इसकी शुद्धता पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
आखिरकार, लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए। कोई फर्जी नाम शामिल न हो। कोई वास्तविक मतदाता अधिकार से वंचित न हो। यही निष्पक्ष चुनाव की सबसे बड़ी कसौटी है।
