*सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी बने रहेंगे, इसमें उनका कार्यकाल बाकी है एक वर्ष
जमशेदपुर/नई दिल्ली : आखिरकार टाटा ट्रस्ट्स में आंतरिक मतभेदों के बीच बड़ा बदलाव हुआ है। टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका मौजूदा कार्यकाल 14 अगस्त को समाप्त होने वाला था। हालांकि, विजय सिंह सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी बने रहेंगे। इस ट्रस्ट में उनका कार्यकाल अभी करीब एक साल बाकी है।
विजय सिंह का इस्तीफा ऐसे समय में हुआ है, जब सर रतन टाटा ट्रस्ट आंतरिक मतभेदों के साथ-साथ नियामकीय जांच से भी गुजर रहा है। ट्रस्ट ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से एक अहम बैठक आयोजित करने की अनुमति मांगी है।
करीब 400 करोड़ रुपये के चैरिटेबल खर्च का मामला
सर रतन टाटा ट्रस्ट के मुताबिक, करीब 400 करोड़ रुपये के चैरिटेबल खर्च और शेयरहोल्डर्स से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण फैसले प्रभावित हो सकते हैं। महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने नवाजबाई शेयरों के कथित ट्रांसफर और स्थायी ट्रस्टियों की नियुक्ति से जुड़ी शिकायत पर फैसला होने तक ट्रस्ट को बैठक करने से रोक दिया था।
इसी बीच विजय सिंह ने अपने फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने ट्रस्ट को सूचित कर दिया है कि वह दोबारा नियुक्ति के लिए विचार नहीं किया जाना चाहते हैं।
टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर अलग राय
विजय सिंह के इस्तीफे के पीछे टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर उनके सार्वजनिक रुख को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सिंह और टाटा ट्रस्ट्स के एक अन्य वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन पहले सार्वजनिक रूप से टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने के पक्ष में अपनी राय रख चुके हैं।
हालांकि, यह रुख नोएल एन. टाटा के नेतृत्व वाले ट्रस्ट्स की मौजूदा सोच से अलग माना जाता है। ट्रस्ट्स टाटा संस को निजी कंपनी के तौर पर बनाए रखने के पक्ष में हैं।
मई में TEDT से भी दिया था इस्तीफा
विजय सिंह और वेणु श्रीनिवासन ने इस साल मई में टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (TEDT) से भी इस्तीफा दिया था। बताया गया था कि ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने दोनों की दोबारा नियुक्ति का विरोध किया था।
सूत्रों के अनुसार, टाटा संस की संभावित लिस्टिंग के समर्थन में विजय सिंह के सार्वजनिक बयानों के कारण सर रतन टाटा ट्रस्ट में उन्हें अगले कार्यकाल के लिए पर्याप्त समर्थन मिलने की संभावना कम थी।
टाटा संस के बोर्ड में भी नहीं मिला था दोबारा मौका
विजय सिंह को पिछले साल टाटा संस के बोर्ड में भी दोबारा नियुक्त नहीं किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स चाहते हैं कि टाटा संस के बोर्ड में उनके प्रतिनिधि कंपनी के स्वामित्व ढांचे और कॉरपोरेट गवर्नेंस जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ट्रस्ट्स के रुख के अनुरूप काम करें।
सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट मिलकर टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में नियंत्रक हिस्सेदारी रखते हैं। ऐसे में दोनों ट्रस्ट्स की भूमिका टाटा समूह के स्वामित्व और रणनीतिक फैसलों में बेहद महत्वपूर्ण है।