August 13, 2026
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पाकिस्तान: बलूचिस्तान में सुरक्षा खतरों के चलते इंटरनेट और वित्तीय सेवाएं बंद, आमजन परेशान

पाकिस्तान: बलूचिस्तान में सुरक्षा खतरों के चलते इंटरनेट और वित्तीय सेवाएं बंद, आमजन परेशान

क्वेटा, 11 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा संबंधी खतरों की आशंका के चलते अधिकारियों ने लगातार दूसरे दिन भी मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद रखीं। स्थानीय मीडिया ने मंगलवार को गृह एवं जनजातीय मामलों के विभाग के सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी।

पाकिस्तानी अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ इलाकों में मोबाइल नेटवर्क आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है, लेकिन कई क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं अब भी पूरी तरह बंद हैं। इसके कारण लोगों को जरूरी डिजिटल संचार सुविधाओं का इस्तेमाल करने में परेशानी हो रही है।

संचार सेवाओं के अलावा, 5 अगस्त से नुश्की जिले में सभी व्यावसायिक और वित्तीय सेवाएं भी बंद हैं। यह वित्तीय बंदी 31 अगस्त तक जारी रहने की संभावना है, जिससे लोगों के लिए बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं तक पहुंच मुश्किल हो गई है।

वित्तीय संस्थानों के बिना पूर्व सूचना बंद होने से बलूचिस्तान में स्थानीय व्यापार और कारोबारी गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। सरकारी कर्मचारी और सेवानिवृत्त लोग अपनी मासिक सैलरी नहीं निकाल पा रहे हैं, जिससे उन्हें राशन और दवाइयां खरीदने में दिक्कत हो रही है। वहीं, छात्र अपनी फीस और रहने के खर्चों का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं।

‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने संचार और वित्तीय सेवाओं के एक साथ बंद होने पर चिंता जताई है और अधिकारियों व बैंकिंग संस्थानों से सेवाएं जल्द बहाल करने की मांग की है, ताकि लोग सामान्य रूप से अपने कामकाज कर सकें।

पिछले सप्ताह बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तानी सेना मंगलवार को मनाए जाने वाले बलूचिस्तान के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों और सार्वजनिक सभाओं को बाधित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।

उन्होंने कि बलूचिस्तान के लोग अपने रुख पर कायम हैं और पाकिस्तानी अधिकारियों के दबाव या पूरे प्रांत में लागू धारा 144 जैसे प्रतिबंधों के आगे झुकने वाले नहीं हैं।

मंगलवार को बलूचिस्तान ने अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। यह एक वार्षिक परंपरा का हिस्सा है, जिसे कई बलूच मानवाधिकार संगठन पाकिस्तान की ओर से क्षेत्र के ‘अवैध कब्जे’ के विरोध के रूप में देखते हैं।

बलूच स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक जड़ें 1947 तक जाती हैं, जब ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद कलात रियासत ने कुछ समय के लिए खुद को स्वतंत्र घोषित किया था। हालांकि, 1948 में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र का विलय कर लिया, जिसका बलूच राष्ट्रवादी समूह लगातार विरोध करते रहे हैं।

सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मीर यार बलूच ने आरोप लगाया कि ‘कब्जा करने वाली’ पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं। उनके अनुसार, राष्ट्रीय आयोजनों को रोकने के लिए 7 अगस्त से 30 अगस्त तक इंटरनेट सेवाएं बंद रखने का फैसला किया है।

हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती, सैन्य संसाधनों या हवाई शक्ति के इस्तेमाल के बावजूद पाकिस्तान बलूचिस्तान में अपनी मौजूदगी को अनिश्चित समय तक बनाए नहीं रख सकता, क्योंकि बलूच जनता का संकल्प मजबूत है।

मीर ने कहा, “बलूचिस्तान गणराज्य बलूच लोगों को उग्रवादी या अलगाववादी बताने की कोशिशों को खारिज करता है। बलूच स्वतंत्रता सेनानी बलूचिस्तान की रक्षा, सुरक्षा और सैन्य ताकत का हिस्सा हैं और उन्हें छह करोड़ बलूच लोगों का समर्थन प्राप्त है। लोग उन पर भरोसा करते हैं क्योंकि वे इसी मिट्टी के बेटे-बेटियां हैं और अपने राष्ट्र के हित में काम करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “ये बल किसी आर्थिक लाभ के लिए नहीं लड़ रहे हैं और न ही अशांति या हिंसा फैलाने के लिए काम कर रहे हैं। वे अपना राष्ट्रीय कर्तव्य निभा रहे हैं, जिसमें शांति और सुरक्षा बनाए रखना, लोगों की रक्षा करना और एक शांतिपूर्ण, समृद्ध तथा विकसित बलूचिस्तान की नींव रखना शामिल है।”

मीर ने दावा किया कि बलूच सशस्त्र समूहों की कार्रवाइयों का उद्देश्य उन नेटवर्कों को खत्म करना और बाहर निकालना है, जिन्हें वे पाकिस्तान से जुड़ा मानते हैं और जो उनके अनुसार बलूचिस्तान में अस्थिरता, असुरक्षा और हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं।

–आईएएनएस

एवाईवीसी

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