एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने मामले में पूर्व सिविल सर्जन व ब्लड बैंक प्रभारी की अग्रिम जमानत खारिज

चाईबासा: पश्चिम सिंहभूम जिले के सदर अस्पताल में पांच बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के चर्चित मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। शनिवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने जिले के पूर्व सिविल सर्जन डॉ. शुसांतो मांझी तथा ब्लड बैंक के पूर्व प्रभारी डॉ. दिनेश सवैया की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

इस मामले में ब्लड बैंक के पूर्व तकनीशियन मनोज कुमार पहले से ही न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सदर थाना में मामला झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर दर्ज किया गया था।

गौरतलब है कि अक्टूबर 2025 में सदर अस्पताल परिसर स्थित ब्लड बैंक से थैलेसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया था। इस घटना के सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और ब्लड बैंक संचालन पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। मामले की जांच के दौरान कई स्तरों पर लापरवाही की बात सामने आई, जिसके बाद संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

अदालत द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।

जिला अभियंता नियुक्ति विवाद पहुंचा हाईकोर्ट, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष ने दायर की याचिका

चाईबासा: पश्चिम सिंहभूम जिला परिषद में डिप्लोमाधारी सहायक अभियंता धीरेंद्र कुमार को जिला अभियंता नियुक्त किए जाने का मामला अब न्यायालय की चौखट तक पहुंच गया है। जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान सदस्य लालमुनि पूर्ति ने इस नियुक्ति को चुनौती देते हुए झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी कर एक जूनियर अधिकारी को जिला अभियंता जैसे महत्वपूर्ण पद पर पदस्थापित किया गया है। याचिकाकर्ता ने इसे सेवा नियमों के विपरीत बताते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

याचिका में यह भी मांग की गई है कि जिला अभियंता का पद कार्यपालक अभियंता स्तर के डिग्रीधारी अधिकारी के लिए निर्धारित किया जाए। इसके समर्थन में झारखंड एवं बिहार पंचायती राज अधिनियमों का हवाला दिया गया है। साथ ही जल संसाधन विभाग को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है।

लालमुनि पूर्ति ने अपनी याचिका में यह प्रश्न उठाया है कि किस आधार पर एक जूनियर अधिकारी को पंचायती राज विभाग में भेजकर जिला अभियंता का दायित्व सौंपा गया तथा इस प्रक्रिया में किन नियमों और प्रावधानों का पालन किया गया। उन्होंने वरिष्ठ अभियंताओं के ऊपर कनिष्ठ अधिकारी को पदस्थापित किए जाने को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।

उल्लेखनीय है कि धीरेंद्र कुमार के जिला अभियंता का पदभार संभालने के बाद उनकी कार्यशैली को लेकर भी चर्चाएं तेज हुई हैं। जिला परिषद के 10 सदस्य उनके कार्यकलापों से असंतोष जताते हुए उपायुक्त, उपविकास आयुक्त तथा विभागीय सचिव को पत्र लिख चुके हैं। अब हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद इस नियुक्ति विवाद पर कानूनी बहस शुरू होने की संभावना है।

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