जमशेदपुर : जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं जनोन्मुख बनाने को लेकर समाहरणालय सभागार में बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की मासिक समीक्षात्मक हुई। उपायुक्त राजीव रंजन ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए।
बैठक में प्रोजेक्ट उल्लास के तहत मिर्गी रोगियों की पहचान एवं उपचार, डायलिसिस सेवा, आईसीयू और शिशु केयर यूनिट की व्यवस्था, कुपोषण उपचार केंद्रों की स्थिति, टीकाकरण अभियान, संस्थागत प्रसव, ममता वाहन सेवा तथा गैर-संचारी रोगों की रोकथाम सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
उपायुक्त ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य केवल मरीजों का इलाज करना नहीं, बल्कि आम लोगों के बीच भरोसा कायम करना और स्वास्थ्य सेवाओं की आसान पहुंच सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए सेवाओं को पारदर्शी, जवाबदेह और आमजन केंद्रित बनाने का निर्देश दिया। साथ ही प्रत्येक माह प्रखंड स्तर पर नियमित समीक्षा बैठक आयोजित करने को कहा।
प्रोजेक्ट उल्लास की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने नियमित स्वास्थ्य शिविरों के जरिए मिर्गी रोगियों की पहचान और उपचार अभियान को तेज करने तथा मरीजों के सतत फॉलोअप पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। वहीं सदर अस्पताल और घाटशिला अनुमंडल अस्पताल में संचालित डायलिसिस सेवाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में मरीजों की डायलिसिस सेवा बाधित नहीं होनी चाहिए। मशीनों की मेंटनेंस और सर्विसिंग का कार्य तय समय के भीतर पूरा करने के निर्देश भी दिए गए।
शिशु केयर यूनिट और कुपोषण उपचार केंद्रों की समीक्षा में नवजात एवं कुपोषित बच्चों के बेहतर इलाज और देखभाल पर जोर दिया गया। बहरागोड़ा, घाटशिला, मुसाबनी, पोटका और टेल्को स्थित एमटीसी में कम बेड ऑक्यूपेंसी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को महिला एवं बाल विकास विभाग, सेविका और सहिया के साथ समन्वय बनाकर जरूरतमंद बच्चों को उपचार से जोड़ने का निर्देश दिया गया। अभिभावकों को एमटीसी में उपलब्ध सुविधाओं और उपचार के लाभों के प्रति जागरूक करने को भी कहा गया।
टीकाकरण कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए घर-घर सत्यापन अभियान चलाने और वंचित परिवारों को जागरूक कर टीकाकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों में स्वास्थ्य कर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से संचालित हो सकें।
संस्थागत प्रसव को लेकर उपायुक्त ने जिले में सभी प्रसव अस्पतालों में कराने पर जोर देते हुए होम डिलीवरी के मामलों का विश्लेषण कर समाधान निकालने और जनजागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में डेंगू और मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियों की रोकथाम को लेकर फॉगिंग, साफ-सफाई और जागरूकता अभियान तेज करने पर भी बल दिया गया। साथ ही राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम, टीबी उन्मूलन अभियान और एनीमिया मुक्त भारत अभियान की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों में एनीमिया जांच और गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग को और मजबूत करने के निर्देश दिए।
बैठक में सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल, एसीएमओ डॉ. अजय सिन्हा, डॉ. मृत्युंजय धावड़िया समेत सभी एमओआईसी, डीपीसी, डीडीएम, बीएएम, बीपीएम, बीडीएम और स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मी मौजूद थे।
