अंबेडकर चौक, साकची में संविधान जागरूकता और समानता पर जोर दिया गया
प्रमुख बिंदु:
- समानता और न्याय को बढ़ावा देने के लिए प्रतीकात्मक रूप से मनुस्मृति जलाई गई
- भारतीय संविधान के प्रति जागरुकता फैलाने का संकल्प
- बड़ी संख्या में सामाजिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया
जमशेदपुर – साकची के ओल्ड कोर्ट अंबेडकर चौक पर पूर्वी सिंहभूम के मूलनिवासी संघ ने 25 दिसंबर 2024 को मनुस्मृति दहन दिवस को “मूलनिवासी मुक्ति दिवस” के रूप में मनाया।
समाज में समानता, न्याय, स्वतंत्रता और भाईचारे की आवश्यकता को उजागर करने के लिए मनुस्मृति का प्रतीकात्मक दहन किया गया था। प्रतिभागियों ने एक समतापूर्ण समाज के मार्गदर्शक के रूप में भारतीय संविधान को घरों में प्रचारित करने का संकल्प लिया।
ऐतिहासिक संदर्भ और उत्सव
डॉ. बीआर अंबेडकर ने 1927 में जाति-आधारित असमानता का विरोध करने के लिए मनुस्मृति को जलाया था। इस प्राचीन ग्रंथ ने व्यवस्थित रूप से हजारों वर्षों तक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और अल्पसंख्यकों को शिक्षा, संपत्ति और शक्ति से वंचित रखा। उस दिन के कार्यक्रम का उद्देश्य अंबेडकर के न्यायपूर्ण और समान समाज के दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करना था।
सामाजिक समूहों से प्रतिनिधित्व
उपस्थित प्रमुख लोगों में सुग्रीव गौतम, रवींद्र प्रसाद, सुनील कुमार, राजेश कालिंदी, हरि किस्ट, शशिकांत नाग, सुबीर सोरेन, शोभा कुमारी, जलेश मुखी और अन्य शामिल थे। उन्होंने संवैधानिक जागरूकता फैलाने और समानता को कमजोर करने वाली ताकतों का विरोध करने के महत्व पर जोर दिया।
