मंत्री चंपई सोरेन ने राज्य में छात्रों को बनाए रखने के लिए शैक्षिक बुनियादी ढांचे में सुधार पर जोर दिया।
झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री चंपई सोरेन ने रांची में पूर्वी भारत का पहला दिव्यांग विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा की।
रांची – झारखंड उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री चंपई सोरेन ने गुरुवार को अपने विभाग द्वारा किये जा रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।
उन्होंने बताया कि रांची में दिव्यांग छात्रों के लिए एक विश्वविद्यालय बनाया जाएगा, जिससे पूर्वी भारत में शैक्षिक सुविधाएं बेहतर होंगी और छात्रों को अन्यत्र जाए बिना शिक्षा प्राप्त करना आसान हो जाएगा।
हमने पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय की प्रगति पर भी चर्चा की। जमशेदपुर बैठक के दौरान इस पर चर्चा की गई। हमें उम्मीद है कि इस महीने नए कुलपति की नियुक्ति हो जाएगी, जिससे परियोजना के विकास में तेजी आएगी।
रांची में दिव्यांग छात्रों के लिए प्रस्तावित विश्वविद्यालय पूर्वी भारत में एक अग्रणी पहल होगी। इसका उद्देश्य दिव्यांग छात्रों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए अनुकूलित शैक्षणिक व्यवस्था और विशेष पाठ्यक्रम प्रदान करना है।
विश्वविद्यालय विकलांग विद्यार्थियों को सहायता प्रदान करने के लिए विशिष्ट पाठ्यक्रम और शैक्षिक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
इसके अलावा, विभाग ने नवोत्थान छात्रवृत्ति योजना भी शुरू की है, जिसका उद्देश्य राज्य में अनाथ और विकलांग छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत, पात्र छात्र अपने पाठ्यक्रम की फीस का पूरा कवरेज प्राप्त कर सकते हैं, जो प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक है।
इसके अतिरिक्त, इन छात्रों को उनके आवासीय और भोजन व्यय के लिए प्रति वर्ष 48,000 रुपये प्रदान किए जाएंगे।
बैठक में जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज और एलबीएसएम कॉलेज जैसे 38 अन्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के जीर्णोद्धार पर भी चर्चा हुई।
गुमला में एक नया इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है, साथ ही देवघर, बरही (हजारीबाग), पतरातू (रामगढ़), बुंडू (रांची), जमशेदपुर और राजनगर (सरायकेला-खरसावां) में नए पॉलिटेक्निक कॉलेज खोलने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
इसके अतिरिक्त गिरिडीह, साहेबगंज, देवघर में नये विश्वविद्यालय बनाने का सुझाव भी दिया गया। खूंटीगुमला और जमशेदपुर।
